संस्कृत हमारी संस्कृति

*जयतु संस्कृतम् I    जयतु भारतम् I*
“वयं समृद्ध-परम्पराया: संवाहका: स्म: । अस्माकं सर्वे ग्रन्था: संस्कृत भाषायामेव सन्ति । येषु अस्माकं संस्कृते: अस्माकं संस्काराणां अस्माकं विचाराणां च  दर्शनानि भवन्ति । यदि वयं संस्कृतम् न जानीम् तर्हि अस्माकं ज्ञानतत्वं,संस्कारं संस्कृते: च  सर्वम् नस्यति।”
अर्थात हम समृद्ध परम्परा के संवाहक हैं। हमारे सभी ग्रन्थ संस्कृतभाषा में ही हैं ,  जिन में हमारी संस्कृति , हमारे संस्कारों और हमारे विचारों  के दर्शन होते हैं । यदि हमने संस्कृत छोड़ दी तो समझो हमारा सब कुछ नष्ट हो जाएगा।
संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है।  इसे ‘देववाणी’ (देवताओं की भाषा) भी कहा जाता है।
 विश्व का पहला ग्रंथ ऋग्वेद  संस्कृत में  ही संकलित (लिखा गया)है I
 पाणिनि  संस्कृत भाषा के विकास में एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर थे। उन्होंने समाज में प्रचलित अष्टाध्यायी नामक व्याकरण की मुख्य पुस्तक लिखी I साहित्यिक संस्कृत और बोलचाल की संस्कृत दोनों ने पाणिनी की भाषा प्रणाली का अनुसरण किया। आज संस्कृत भाषा की शुद्धता की कसौटी पाणिनी की अष्टाध्यायी है। संस्कृत को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में आधुनिक भारतीय भाषाओं की सूची में शामिल किया गया है।
संस्कृत भाषा का न कोई आरंभ है और न कोई अंत।  स्वयंभू ईश्वर ने इसे बनाया है। यह दिव्य  और शाश्वत है। इसका सबसे पहले प्रयोग वेदों में हुआ था और उसके बाद से यह अन्य क्षेत्रों में अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है।
आधुनिक भारतीय भाषाएँ संस्कृत से विकसित हुई हैं, और दक्षिण भारत की अन्य आधुनिक भारतीय भाषाएँ – तमिल, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु द्रविड़ भाषा परिवार से विकसित हुई हैं। दक्षिण भारतीय भाषाएँ संस्कृत भाषा से समृद्ध और पोषित हैं।
यद्यपि संस्कृत भाषा वैदिक और लौकिक भेद के रूप में  दो प्रकार की है। वैदिक संस्कृत का प्रयोग वेद आदि में होता है। लौकिक संस्कृत को हम विद्यालय  स्तर के संदर्भ में ही पढ़ते हैं।
संस्कृतेन् विना वयं भारतीया: स्व-उत्सवान् विस्मरन्ति ।  सर्वे भारतीया: स्वयं संस्कृतं पठन्तु अन्यानपि च पाठयन्तु  I अर्थात संस्कृत के बिना हमारे भारतीय अपने उत्सवों को भूलते जा रहे हैं।  सभी भारतीय (भारत में  रहने वाले)
स्वयम् संस्कृत पढ़ें और अन्य भारतीयों को भी  पढ़ाएँ I
*”विद्यादानं सर्वदानं विशिष्यते।*
*विद्यादान सभी दानों में श्रेष्ठ है।”*
 संगीता बर्त्वाल
 हिंदी और संस्कृत अध्यापिका,
के.आर. मंगलम वर्ल्ड स्कूल जी के 1

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