आओ पढ़ें, पढ़ाएँ हिन्दी

” हिन्दी हमारी ताकत है हिन्दी हमारी विरासत है”

भाषा जहाँ भावों और विचारों की संवाहक है वहीं संस्कृति की मानक भी। हिन्दी हमारी पौराणिक कहानियों व संस्कारों की भाषा है । हिन्दी हमारे सपनों कल्पनाओं की भाषा है ।भारत गणराज्य में बोले जाने वाली यह राष्ट्रीय आधिकारिक भाषा है ।इसे विश्व में अंग्रेज़ी और स्पेनिश के बाद सबसे व्यापक रूप से बोले जाने वाली भाषा के रूप में स्थान दिया गया है।परन्तु विविधता और बहुभाषा भाषी भारत में हिन्दी के संघर्ष से हम और आप भली भांति परिचित हैं ।
10 वीं शताब्दी में संस्कृत से इसका उद्भव माना जाता है। कालांतर में वह पाली, प्राकृत और अपभ्रंश की धारा से गुजरती हुई आज अपने वर्तमान रूप में हमारे सामने है। हिन्दी को हिंदवी, हिंदुस्तानी और खड़ी बोली के रूप में भी जाना जाता है। हिन्दी विश्व की एकमात्र वैज्ञानिक भाषा है । विश्व में हिन्दी की स्थिति देखें तो आज भारत के बाहर 20 से ज्यादा देशों में हिन्दी भाषा का प्रयोग किया जाता है।
हिन्दी वही भाषा है जो आज़ादी के आंदोलन में जन-जन का शस्त्र बनी , हिन्दी वही भाषा है जिसने विश्व को विवेकानंद के समक्ष नतमस्तक कर दिया और हिन्दी ही वह भाषा है जिसका प्रशिक्षण अंग्रेजों ने भी अपने प्रशासनिक अधिकारियों को दिया जिससे वे 200 वर्ष तक भारत पर शासन कर सकें।
छात्रों में राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव की भावना को बढ़ावा देने के लिए हिन्दी भाषा के महत्व को समझना बहुत ज़रूरी है।
हिन्दी भाषा शिक्षण का मकसद बच्चों में सुनने, बोलने, पढ़ने, लिखने, व्याकरण, भाषा प्रयोग, और सृजनात्मकता के गुण विकसित करना होता है।
केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति में प्राथमिक कक्षाओं के स्तर पर मातृभाषा में पठन-पाठन एक सराहनीय पहल है,जो निश्चित रूप से हिन्दी की वर्तमान स्थिति को मजबूत बनाने में सहयोग देगी। साथ ही उच्च स्तरीय शिक्षा के अंतर्गत भी हिन्दी भाषा के लिए ऐसे बहुत से उद्योग किए जा रहे हैं जैसे केंद्र सरकार के निर्देश पर साल 2024-25 से, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, और छत्तीसगढ़ में MBBS की पढ़ाई हिन्दी में होनी आरंभ हो गई है । महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा द्वारा हिन्दी भाषा में MBA का पाठ्यक्रम आरंभ किया गया । इसी तरह ‘Economics times’ और ‘Business standard’ जैसे समाचार पत्र हिन्दी में प्रकाशित होने लगे हैं। । हिन्दी के ब्लॉगर की संख्या व कमाई देखें तो तकनीकी स्तर पर हिन्दी का आधिपत्य बढ़ता दिखाई दे रहा है ।
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हिन्दी के महत्व को तेज़ी से पहचान रही हैं क्योंकि वे विशाल भारतीय बाज़ार में अपना दबदबा बना रही हैं। इसलिए, स्कूलों की ज़िम्मेदारी है कि वे छात्रों को ऐसी दुनिया के लिए तैयार करें ।
हिन्दी भाषा से छात्रों को अपनी विरासत से जुड़ने और भारत की विविध सांस्कृतिक ताने-बाने को समझने में मदद मिलती है क्योंकि :-

“हिन्दी की गंगा से, संस्कृति पोषित होगी,
सभ्यता के वृक्ष हरे होंगें समृद्धि संचित होगी।”

तरुणा पुण्डीर
विभागाध्यक्षा
हिन्दी विभाग
के आर मंगलम वर्ल्ड स्कूल जी के 1 दिल्ली।
चलभाष 9818123555
tarunapundeer@gmail.com

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